मंगलवार, 2 जून 2020

नाग पंचमी

नाग पंचमी 

नागपंचमी पूजा विधि : ऐसे करें पूजन, बहुत काम की बातें हैं ये...

नाग पंचमी के दिन घर के सभी दरवाजों पर खड़िया (पाण्डु/सफेदे) से छोटी-छोटी चौकोर जगह की पुताई की जाती है और कोयले को दूध में घिसकर मुख्‍यत दरवारों बाहर दोनों तरफ, मंदिर के दरवाजे पर और रसोई में नाग देवता के चिन्ह बनाए जाते हैं।

आजकल यह फोटो बाजारों में मिलते हैं, जिन्‍हें आप इस्‍तेमाल कर सकते हैं, नागों की पूजा मीठी सेंवई खीर से की जाती हैं और इस दिन नागों को दूध पिलाने की परंपरा है, जिसके लिए खेतों में या किसी ऐसे स्‍थान पर जहां सर्प होने की संभावना हो वहां एक कटोरी में दूध रखा जाता है।
 
सबसे पहले प्रात: घर की सफाई कर स्नान कर लें।

इसके बाद प्रसाद के लिए सेवई और चावल बना लें।

इसके बाद एक लकड़ी के तख्त पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर नागदेवता की मूर्ति या तस्वीर रख दें।

फिर जल, सुगंधित फूल, चंदन से अर्ध्य दें। नाग प्रतिमा का दूध, दही, घृ्त, मधु ओर शर्कर का पंचामृत बनाकर स्नान कराएं।

प्रतिमा पर चंदन, गंध से युक्त जल अर्पित करें।

वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, हरिद्रा, चूर्ण, कुमकुम, सिंदूर, बेलपत्र, आभूषण और पुष्प माला, सौभाग्य द्र्व्य, धूप दीप, नैवेद्य, ऋतु फल, तांबूल चढ़ाएं। आरती करें। अगर काल सर्पदोष है तो इस मंत्र का जाप करें: 
 
 ॐ कुरुकुल्ये हुं फट स्वाहा
 
पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है और भगवान शिव जी भी सर्प माला को पहने रहते हैं इसलिये सर्प को देवता के रूप में पूजा जाता है।

भारत में नागों की पूजा करने का एक वैज्ञानिक कारण भी है, खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहे आदि जीवों का सर्प नष्‍ट कर देता है, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है।
 
एक सर्प ने भाई बनकर अपनी बहन की सुरक्षा की थी और भाई का फर्ज निभाया था, इसलिए इस दिन महिलाएं नागों को दूध पिलाती हैं और उसमें प्रार्थना करती हैं उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा करें।
सर्प ही धन की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं और इन्हें गुप्त, छुपे और गड़े धन की रक्षा करने वाला माना जाता है। नाग, मां लक्ष्मी की रक्षा करते हैं। जो हमारे धन की रक्षा में हमेशा तत्पर रहते हैं इसलिए धन-संपदा व समृद्धि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी मनाई जाती है।
 
इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है।
 
288 कालसर्प योग होते हैं कुंडली में, इसलिए हर किसी के लिए जरूरी है नागपंचमी पूजन...
 
यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष, अंगारक दोष, चांडाल दोष एवं ग्रहण दोष अथवा पितृ दोष है और उसके कारण आपके जीवन के कई कामों में विघ्न आ रहा है तो नाग पंचमी का दिन इन सब दोषों की शांति के लिए बेहद फलदायी होता है। राहू के जन्म नक्षत्र ‘भरणी’ के देवता काल हैं एवं केतु के जन्म नक्षत्र ‘अश्लेषा’ के देवता सर्प हैं।
 
अतः राहू-केतु के जन्म नक्षत्र देवताओं के नामों को जोड़कर कालसर्प योग कहा जाता है। राशि चक्र में 12 राशियां हैं, जन्म पत्रिका में 12 भाव हैं एवं 12 लग्न हैं। इस तरह कुल 144+144 = 288 कालसर्प योग घटित होते हैं।
 
5 अगस्त 2019 यानी नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग/दोष, अंगारक दोष, चाण्डाल दोष या ग्रहण दोष अथवा पितृदोष आदि की शांति कराकर विघ्नों को दूर किया जा सकता है।
 
जानिए कैसे करें शांति विधान पूजन
 
प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा के स्थान पर कुश का आसन स्थापित करके सर्व प्रथम हाथ में जल लेकर अपने ऊपर व पूजन सामग्री पर छिड़कें, फिर संकल्प लेकर कि मैं कालसर्प दोष शांति हेतु यह पूजा कर रहा हूं।
 
अतः मेरे सभी कष्टों का निवारण कर मुझे कालसर्प दोष (पितृदोष/अंगारक दोष/चाण्डाल दोष/ग्रहण दोष) से मुक्त करें। तत्पश्चात् अपने सामने चौकी पर एक कलश स्थापित कर पूजा आरंभ करें। कलश पर एक पात्र में नाग-नागिन यंत्र एवं कालसर्प यंत्र स्थापित करें, साथ ही कलश पर तीन तांबे के सिक्के एवं तीन कौड़ियां सर्प-सर्पनी के जोड़े के साथ रखें। उस पर केसर का तिलक लगाएं अक्षत चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाएं तथा काले तिल, चावल व उड़द को पकाकर शक्कर मिश्रित कर उसका भोग लगाएं, फिर घी का दीपक जला कर निम्न मंत्र का उच्चारण करें।
 
ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु।
ये अंतरिक्षे ये दिवितेभ्यः सर्पेभ्यो नमः स्वाहा।।
 
राहु का मंत्र- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
 
इसके बाद सर्वप्रथम गणपति जी का पूजन करें, नवग्रह पूजन करें, कलश पर रखी समस्त नाग-नागिन की प्रतिमा का पूजन करें व रूद्राक्ष माला से उपरोक्त कालसर्प शांति मंत्र अथवा राहू के मंत्र का उच्चारण एक माला जाप करें। उसके पश्चात् कलश में रखा जल शिवलिंग पर किसी मंदिर में चढ़ा दें, प्रसाद नंदी (बैल) को खिला दें, दान-दक्षिणा व नये वस्त्र ब्राह्मणों को दान करें। कालसर्प दोष वाले जातक को इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए।
 
अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन मिलता है, जिसमें अनन्त, वासुकी, पदम, महापद्म, तक्षक, कुलिक, कर्कोटक और शंखपाल यह प्रमुख माने गए हैं। स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण तथा कर्मपुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है।

श्री हनुमान चालीसा

गरुड़ पुराण की बस 1 बात ध्यान में रख ली तो धन बरसेगा, सौभाग्य चमकेगा

कैसे पहचानें कि दैवीय शक्ति आपकी मदद कर रही है, जानिए 11 संकेत

जो लोग अकेले रहने का दम रखते हैं, ये 9 गुण केवल उन्हीं में हो सकते हैं

कब्ज का अचूक इलाज हैं यह 10 घरेलू उपाय

budh ka rashi parivartan : मिथुन राशि में बुध, क्या आपके लिए है शुभ?

गंगा दशहरा 2020 : पुराणों के अनुसार जानें Ganga स्नान विधि, दान का महत्व एवं स्तोत्र

आपके घर कब होगा धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन, जानिए स्वप्न फल से

Ganga Dussehra 2020: गंगा दशहरा पर्व शुभ मुहूर्त,महत्व,मंत्र और कथा

mercury : बुध ने कर लिया है राशि परिवर्तन,किन राशि वालों के जीवन पर हो रहा है असर

Ganga Chalisa : गंगा दशहरा पर पढ़ें श्री गंगा चालीसा- 'जय जग जननि अघ खानी'

Ganga Dussehra 2020 : सहनशील, क्षमाशील और मधुर बनिए, यही सीख देती हैं मां गंगा

Shri Krishna 30 May Episode 28 : बरसाने और गोकुल के बीच जमकर हुई होली और चढ़ा राधा का ऋण

रविवार, 31 मई 2020 : आज इन 3 राशि वालों के लिए होगा रोमांस का समय

31 मई 2020 : आपका जन्मदिन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें