गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025

मन मंदिर (कविता )

 मन मंदिर

मन मंदिर है कितना सुंदर

मन मंदिर में बसे हैं राम ।

जीवन चाहे कितना दुखमय

मिलता उन्हें हर पल आराम ॥

मन मंदिर में रख लो प्यारे

दया, क्षमा, करुणा का भाव

चिंताएँ चाहे आ जाएं

कभी न ठिठके मेरे पाँव ॥

मन मंदिर होता है प्यारा

जैसा सूरज चंदा प्यारा

पत्ते,फूल, वृक्षावलियों

होता यह जग उजियारा ॥

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