रविवार, 3 नवंबर 2024

छठ पर्व मनाएं मगर सावधानी से

 छठ पर्व आ गया है और उसके साथ तैयारी भी शुरू हो गई है ।जाहिर है ऐसे मौक़े पर खुशियों का पारावार नहीं रहता ।हर व्यक्ति के दिल में आनंद और उत्साह और उसके साथ एक अलग भक्ति जो हमें जोड़ती है अपनी परंपरा से रीति रिवाज से पर्व त्योहार से और अपने-अपने कर्मों से भी ।और जाहिर है कि पर्व त्यौहार के अवसर पर हमारे भीतर जो बंधन होता है उससे हम मुक्त होते हैं और मुक्ति की स्थिति यह कि हम अपना कर्तव्य भूल जाते हैं अपनी सावधानियां भूल जाते हैं । कई तरह के खतरे मोल ले लेते हैं और गलतियां कर बैठते हैं ।

अक्सर छठ पर्व में लोग नदियों तालाबों में स्नान करते हैं ।और बच्चों या महिलाओं को गहरी नदी में जाकर डुबकियां लगाते हुए देखा  जाता है ।ऐसे अवसर पर यदि ध्यान ना दिया जाए तो दुर्घटना होने का अंदेशा रहता है ।इसी तरह बाजार में पूजा का सामान लेते हुए आने-जाने के क्रम में हम हड़बड़ी कर बैठते हैं और चोट - चपेट के शिकार हो जाते हैं ।और इसके अलावा जब छठ पर्व के मौके पर गंगा नदी या तालाब के किनारे डूबते और उगते सूर्य को अर्ध्य दिए जाते हैं तब बच्चे पटाखे जलाने लगते हैं जिससे उनके हाथ पांव चेहरे आदि जलने का भी खतरा बना रहता है ।इस तरह की कई और समस्याएं हम देखा करते हैं और उससे हम सावधान नहीं रह पाते ।

इसी तरह छु्ट्टी के मौसम में बच्चे बाजार की चीजें भी खाने लगते हैं । जिससे उनके पेट खराब होने का डर रहता है और सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है ।छठ पर्व के मौके पर हमें कई तरह की सावधानियां के साथ घर में रहना चाहिए साथ ही अपने बच्चों को यह दायित्व बोर्ड दिया जाना चाहिए कि वह आवश्यकता अनुसार घर में अपने माता-पिता या अपने संबंधियों का सहयोग कर सके। इस तरह के अवसर पर भी अक्सर हम कई तरह की लापरवाहियां कर बैठते हैं जो खतरे से खाली नहीं होता ।जैसे -

शुद्धता - अशुद्धता का ख्याल नहीं रखना ।

साफ -सफाई का ख्याल नहीं रखना ।

लोगों से मधुर व्यवहार का ख्याल नहीं रखना ।

अपने काम को समय पर करने का ख्याल नहीं रखना

 और अपने स्वास्थ्य का भी ख्याल नहीं रखना ।

इस प्रकार से हम छठ पर्व के  मौके पर हम अपना ख्याल रख सकते हैं और दूसरों का भी ख्याल रख सकते हैं ।


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