गुरुवार, 30 मार्च 2023

राम की महत्ता

 भारतीयता के केंद्र में भगवान राम का जीवन आदर्श नए रूपों में आह्लादित करता है। राम केवल ईश्वर नहीं है वह तो केवल धरती के पालनहार हैं। इसके साथ-साथ राम हमारे जीवन के साथ जुड़े हुए हैं हमारे सुख दुख के साथ जुड़े हुए हैं हमारे राग विराग आशा निराशा प्रेम श्रद्धा और भक्ति सब से जुड़े हुए हैं। राम हमारे लोक जीवन से जुड़े हुए हैं और उनका यह जुड़ाव हमें भीतर से रोमांचित करता है वह हमें बहुत कुछ सिखा जाता है हमें भीतर तक जवान बनाता है और सुसंस्कृत भी। राम की कथा केवल एक युग की कथा नहीं है वह निरंतर चलने वाली कथा है जो कथा हमें यह बतलाती है कि हम अपने जीवन को किस तरह हमारे अपने जीवन को हम कैसा बनाएं अपने जीवन को किस रूप में आगे ले चलें। मानव जीवन प्रारंभ से ही आशा निराशा से जूझता रहा है जीवन में सुख शांति आते हैं और दुख के क्षण भी आते हैं जीवन में जन्म का उत्सव भी होता है और मरने के बाद निधन की स्थिति में वियोग की पीड़ा से आहत होकर व्यक्ति तार-तार भी हो जाता है और फिर उसे कुछ नहीं सूझ पाता ।और जब जब रामनवमी आता है तब तक हमें राम की सुधि आती है राम के परिवार की सुधि आती है भक्तराज हनुमान की सुधि आती है और जब चारों ओर राम राम की जय कार से वातावरण अनुगूंज होने लगता है तब हमें यह बोध होता है कि हम राम के बैनर तले खड़े हैं। राम युगपुरुष हैं वह हमारे स्वामी हैं मालिक हैं हमारे सबसे बड़े अभिभावक भी हैं और सबसे बड़े मार्गदर्शक जिनके द्वारा दिया गया उपदेश जिनके द्वारा किए गए कर्मों का एक-एक ब्यावरा हमारे अवचेतन मन को झंकृत करते रहता है और हम बरबस राम की ओर खींचे चले जाते हैं राम हमें अपने साथ एक नए कल्पना लोक में लिए चलते हैं जहां केवल और केवल धर्म और सत्कर्म सद्विचार और सदाचार जहां सेवा भावना की भावुकता और कर्तव्य परायणता का प्रबल आग्रह हमें भीतर तक झंकृत करता है भीतर तक हमें खींचता रहता है भीतर तक हमें सोचता रहता है नए-नए विचारों नए-नए कर्तव्य बोध के साथ कि हम अपने जीवन को कैसे ले चलें कैसे हम अपने जीवन को आगे की ओर बढ़ाएं हर पल चिंतनशील रहता है वह हर पल सोचता रहता है वह हर पल विचार करता रहता है और उसका यह विचार जीवन की उन्नति का साधक होता है बाधक नहीं ।राम केवल त्रेता युग  की कथा से संबंधित नहीं है ।वह इस कलिकाल में भी मौजूद हैं राम की मौजूदगी हमें बार-बार प्रेरित करती है कुछ कुछ नया करने की कुछ ना कुछ नया सोचने की कुछ ना कुछ कल्पना करने की और कुछ ना कुछ संघर्ष करने की सीख देती है और राम की सीख हमारे जीवन की बहुत बड़ी सीख है जिसे ना तो पुस्तकों में पढ़ा जा सकता है और ना किसी उपदेशक से सुना जा सकता है वह केवल महसूस किया जा सकता है और वह केवल भीतर तक महसूस किया जा सकता है ।

लेकिन इतना तो तय है कि राम के बगैर हमारा काम नहीं चल सकता। यह जानते हुए भी कि राम का अवतार हुआ था राम राजा दशरथ के गृह में पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे यह जानते हुए भी कि दशरथ के आंगन में बिहार करने वाले राम जीवन को सत्य के साथ जीते हैं जीवन को संघर्ष के साथ जीते हैं जीवन को धर्म और कर्तव्य को साथ लेकर जीते हैं राम जीते हैं तो मर्यादा के साथ राम यदि काम करते हैं तो अपने धर्म के साथ राम यदि युद्ध में लड़ने के लिए आगे बढ़ते हैं तो वहां भी नीति और नियमों से बंधे हुए और यही तो राम की सबसे बड़ी खासियत है। राम की खूबी इस बात में नहीं है कि उन्होंने रावण को मार डाला था राम की खूबी इस बात में भी नहीं है कि उन्होंने 14 वर्ष तक जंगल की हवा खाई थी जानकी खुद इस बात में भी नहीं है कि उन्होंने अवतार धारण करके धरती को पापा के भार से दबे हुए भारत वासियों को मुक्त किया था।राम ने जो कुछ किया है वह इतिहास के और पुराण के अमित पन्नों में दर्ज है लेकिन उनका जीवन चरित्र देश और काल की सीमा से आगे बढ़कर हर क्षण हर पल हमारा उत्साहवर्धन करता है हमें पल पल जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है हमें पल पल सावधान करता है हमें पल पल जीवन जीने की सीख देता है हमें पल-पल लोक व्यवहार और परंपराओं से प्राप्त जीवन मूल्य के साथ अपने अंतर्संबंध को कायम करने के लिए लगातार प्रेरित करता है राम इसलिए हमें पसंद आते हैं कि वह हमारे मन और प्राणों से जुड़े हुए हैं उनका चिंतन और विचार हमें बार-बार आकर्षित करता है और हम हर हालत में राम के साथ अपने आपको खड़े महसूस करते हैं। जब दुख की दरिया हमें अपने आगोश में लेने के लिए प्रेरित होती है तब भी हम राम के सम्मुख आकर राम की शक्ति पूजा का शिलान्यास करते हैं और जब जीवन में प्रेम और सौंदर्य की बयार बहने लगती है तब हम

 श्याम गौर किमी कहौं बखानी ।

गिरा अनयन नयन बिनु बानी ॥

का राग जपते हुए राम को भीतर से अपने आस पास महसूस करते हैं ।राम हमारे जीवन के साथ साथ चलते हैं बल्कि हर एक प्राणी के साथ-साथ जहां राम जीवन के आदर्शों से अभिप्रेरित होकर   राम को सबसे बड़ा संवाहक मानने लगते हैं। क्योंकि  हम राम के बगैर नहीं रह सकते । राम हमारे साथ हर क्षण और हर परिस्थिति में खड़े होते हैं । हमें हिम्मत देते हैं हमें नई ताजगी और ताकत भी देते हैं ।सच तो यह है कि राम की गाथा उनके जीवन के एक एक प्रसंग हमें भीतर से उकसाते हैं ।राम कितने सुंदर हैं बाहरी सौंदर्य और भीतरी सौंदर्य - दोनों में अद्भुत और अप्रतिम।निराश और हताश की स्थिति में राम थक हार कर बैठते नहीं बल्कि उसके लिए हुए उपाय ढूंढते हैं उनका उपाय बिल्कुल एक नए रहस्यों से भरा हुआ है जोहमें आज भी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यदि जीवन में स्त्री का साथ है तो आप किसी भी संघर्ष से ऊपर उठकर अपनी विजय पताका लहरा सकते हैं। एक स्त्री ही किसी और अन्य स्त्री को बचाने के लिए पुरुष का साथ दे सकती है जो हम निराला के द्वारा राम की शक्ति पूजा की कथा में वर्णित संदर्भ गत बातों से ग्रहण कर सकते हैं बहुत कुछ सीख सकते हैं और संसार को जब बता सकते हैं कि यदि हम अपने जीवन में नारी का सम्मान कर रहे हैं तो यह महत्वपूर्ण है और प्रत्येक स्थिति में सेवा का भाव बनाए रखना चाहिए। राम की पत्नी सीता रावण के हाथों हरी जा चुकी हैऔर बचाव का कोई रास्ता नहीं दिखलाई पड़ता है तब राम किसी अन्य स्त्री का सहारा लेते हैं। क्या सीता में शक्ति नहीं थी क्या सीता महाशक्ति की महिमा से कम रही हैं क्या ? क्या सीता की शक्ति कमजोर पड़ गई थी ? चाहे कुछ भी हो सीता को बचाना राम का फर्ज था और राम दुर्गा की उपासना के माध्यम से यह हम संसारियों को यह बताने का प्रयास करते हैं कि जीवन में जब संकट आए तो नारी का सम्मान तो करेंगे ही नारी से यदि नारी से यदि सहायता लेनी है तो हमें पीछे नहीं रहना चाहिए क्योंकि नारी के द्वारा ही कोई व्यक्ति अपने निजी समस्याओं का समाधान कर सकता है। आज हम अपने घर में भोजन बनाने के लिए घर की सफाई करने के लिए तथा अनेक प्रकार के जीवन को चलाने के लिए बच्चे की देखभाल करने के लिए हम किसी स्त्री की आवश्यकता के महत्व को समझते हैं और वह स्त्री पत्नी भी होती है बहन भी होती है माता भी होती है काम करने वाली नौकरानी भी होती है और हमारी अपनी पड़ोसन भी हो सकती है जिसके द्वारा हम अपने कार्य की सिद्धि कर पाते हैं और जीवन को बेहतर तरीके से जीने के लिए जीवन के संघर्षों से लोहा ले पाते हैं। यहां यह यह कार्य एक नारी ही कर रही है ।चाहे आप उसे पैसे देकर रखे हैं या उसे घर के सदस्य के रूप में कोई नाम दे सकते हैं लेकिन काम करने वाला तो कोई स्त्री ही है जिसके द्वारा आप जीवन के संघर्ष में विजयी हो रहे हैं ।

राम का जो आचरण हम बचपन से लेकर उनके पूरे जीवन काल में देखते हैं वह हमें बहुत ही सुंदर रूप में भाता है क्योंकि राम का चरित्र राम का मन राम का हृदय हमें बार-बार अपनी और आकर्षित करता है और राम का यह चारित्रिक आकर्षण हमें ज्यादा ही अपनी ओर खींचता है वह हमें ज्यादा ही भाता है। राम में जो चुंबकीय व्यक्तित्व है उसकी कोई सानी नहीं है क्योंकि राम हर परिस्थिति में अपने आप को संघर्ष से जोड़ते हैं राम  आराम नहीं चाहते हैं राम श्रम के साथ जीना चाहते हैं राम आलस्य करना नहीं जानते राम अनिर्णय की स्थिति में भी नहीं रहते। लेकिन राम सब कुछ जानते हुए भी अपना हक पाना चाहते हैं और उनका जो संघर्ष है वह संघर्ष हमें बार-बार प्रेरित करता है जीवन में आगे बढ़ने के लिए। क्योंकि जीवन जीने के लिए हमें शक्ति भी चाहिए साहस भी चाहिए निर्भरता भी चाहिए आनंद भी चाहिए उल्लास भी चाहिए ज्ञान और विज्ञान भी चाहिए नई नई सूझबूझ के साथ साथ ज्ञान का विस्तार भी चाहिए। राम हर बार हमारी हर परंपरा और पर्व त्यौहार में हमारे साथ काम आते हैं क्योंकि राम के नाम के बगैर कोई काम तो सफल ही नहीं हो सकता और राम ऐसे हैं कि वह जन्म के साथ ही अपनी उपस्थिति हर बार दर्ज कर आते हैं और उनके जन्म के उत्सव के साथ साथ जीवन का एक विशाल मंच और चुनौती हमारे सामने उठ खड़ा होता है । और ऐसी स्थिति में हम अपनी थकान को भूल जाते हैं अपने भीतर के डर और भय को भूल जाते हैं राम के साथ और राम की कथा के साथ हम हर बार अपने आपको नया और तेजस्वीवान पाते हैं। विवाह के समय राम हर बार किसी न किसी रूप में गीतों के माध्यम से हमारे अंतःकरण को पवित्र करते रहते हैं हमारे अंतःकरण में जीवन के संघर्ष को हमारी चुनौती को हमारे जीवन में आने वाली हर एक समस्याओं को सामने रख देते हैं क्योंकि राम के बगैर जीवन संघर्ष दूर नहीं हो सकता है और जब हमारे साथ राम होते हैं तो कहना ही क्या ?

राम हर बार हमारे भीतर सफलता के बीज होते हैं राम की सफलता इस बात में नहीं था कि उन्होंने धर्म को नहीं छोड़ा उन्होंने मर्यादा को नहीं छोड़ी उन्होंने माता पिता और गुरु की सेवा की भावना को नहीं छोड़ा उन्होंने अपने पड़ोसियों तक का मान रखा और इतना ही नहीं वह पशु पक्षी बंदर भालू के साथ-साथ समस्त जड़ चेतन को अपने स्पर्श से कृतार्थ कर देते हैं एक ओर उन्होंने सुग्रीव की तो दूसरी ओर उन्होंने पाषाण बनी हुई अहल्या का उद्धार कर दिया। राम उद्धार ही नहीं करते राम हमारे चरित्र का निर्माण करते हैं हमारे विचारों का निर्माण करते हैं हमारे संस्कारों का निर्माण करते हैं और हमारे आसपास के वातावरण को पवित्र बनाकर जीवन में एक नया सौन्दर्य रचते हैं।

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